इसी बहाने
बोल कि लब आज़ाद हैं तेरे बोल ज़ुबां अब तक तेरी है - फ़ैज़
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Sunday, August 2, 2009
आरा मशीन पर रख दो सारे ग़म
कंस्ट्रक्शन का बूम है
कुछ तो फ़ायदा उठा लो
मेरी मानो
आरा मशीन पर रख दो सारे ग़म
एक-एक ग़म
बेमौत मरेगा
टुक़ड़े-टुकड़े
यहां-वहां गिरेगा
रह जायेंगी बस ख़ुशियां
समेट के सारी
ख़ुशियां प्यारी
ग़म की दीवार ढहाओ
इमारत बुलंद बनाओ
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