आपने लियोपॉल्ड कैफ़े का नाम तो सुना होगा। अपने देश में त्रासदियां ही जगहों को जोड़ती हैं। जब मुंबई डूबने लगता है तो लोअर परेल, घाटकोपर जैसे इलाक़ों के नाम पूरे देश को पता लग जाते हैं। पश्चिम बंगाल और झारखंड की जगहों को नक्सलवाद ने जनवाया।हां, तो मैं बात कर रहा था, लियोपॉल्ड़ कैफ़े की...26/11 के हमले का गवाह लियोपॉल्ड कैफ़े। जहां ख़ून के छींटे सबसे पहले पड़े।
लियोपॉल्ड, ख़ून के इन छींटों का सौदा कर रहा है।
वैसे तो अब तक की ज़िंदगी ने बंदे को हर तरह के झटकों के लिए तैयार कर दिया है पर ये झटका दिल पर थोड़ा भारी गुज़रा। दरअसल, जो गोलीबारी यहां हुई थी उसके निशानों को इसकी दीवारों और शीशों पर सुरक्षित रखा गया। यहां तक तो ठीक है। लेकिन अब, कैफ़े ने कॉफ़ी मग और टी-शर्ट बेचना भी शुरु कर दिया है। मग के लिए आपको देने होंगे 300 रुपये, जिस पर 'गोली के उस निशान' की तस्वीर होगी- नाम रखा है- बुलेट प्रूफ़ मुंबई । टी-शर्ट की क़ीमत रखी गई है 400 रुपये। और हां, अब तक 3000 मग बिक भी चुके हैं। एक नया फ़्लोर बन गया है, ग्राहक जो बढ़ गए हैं। यानी, कुल मिलाकर लियोपॉल्ड के लिए हमला फ़ायदे का सौदा रहा।
इस 'कारोबार' से मुझे शायद ज़रा भी तकलीफ़ नहीं हुई होती, अगर मुझे ये पता लगता कि इन कॉफ़ी मग्स या टी-शर्ट्स से होने वाली कमाई को हादसे के शिकार हुए परिवारों को दिया जाएगा।
लेकिन अफ़सोस, ये तो एक शातिर 'बिज़नेसमैन' का बेहतरीन बिज़नेस मूव निकला।
(चित्र सौजन्य: ओपन)
26/11- शहर के सीने में भी दिल धड़कता है