Wednesday, August 12, 2009

इस भ-सूंड ने तो परेशान कर दिया !


आपको पता है, यूपी में आकाशवाणी हुई? क्या कहा, आपने नहीं सुनी। नहीं जनाब, अपने कानों को दोष देने की ज़रूरत नहीं है। दरअसल ये हमारे आपके सुनने के लिए बनी भी नहीं थी। ये हायली एनक्रिप्टेड आकाशवाणी उत्तर प्रदेश शासन के लिए थी जो जल्द ही डीक्रिप्ट कर ली गई। संदेशा है कि उठी सूंड वाले हाथी से बीएसपी के चुनाव चिन्ह को जोड़ कर न देखा जाए, ये तो अनादि काल से भारत में स्वागत प्रतीक के तौर पर इस्तेमाल होते आए हैं। लेकिन मज़ेदार बात ये कि ये सब बिल्कुल अचानक हुआ। जैसे आप सुबह उठ कर पाएं कि आज अख़बार में स्वाइन फ़्लू से जुड़ी कोई ख़बर नहीं है। चुनाव आयोग के डंडे ने यूपी सरकार के दिमाग़ के सारे तंतुओं को पहली बार एक साथ काम करने का मौक़ा दिया और नतीजा सामने है। उठी सूंड लाख की, झुकी सूंड खाक की। बुतपरस्त देश में यूं भी मूर्तियां बनवाना कोई गुनाह तो नहीं।

लेकिन जबसे ये ख़बर हाथियों को पता लगी है, हड़कंप मच गया है। यूनियन नेता गजराज ने कहा है कि हमारे यहां सूंड के स्टाइल पर भेदभाव की इजाज़त नहीं है। अगर आदमी अपनी नाक जब चाहे ऊपर-नीचे कर सकता है तो हम क्यूं नहीं। हमारी ये मांग है कि हमारे झुकी सूंड वाले साथियों को बराबरी का दर्जा दिया जाए। अब गजराज को कौन समझाए कि इधर उन्हें बराबरी का दर्जा मिला नहीं कि उधर चुनाव आयोग दर्ज चिन्ह ही छीन लेगा। लेकिन गजराज जो अड़े सो अड़े। कहते हैं कि उनके समाज में इस उठी-झुकी सूंड के चक्कर में ख़ासा कन्फ़्यूजन हो गया है। नन्हे हाथियों को समझ ही नहीं आ रहा कि वो कब अमर होंगे- उठी सूंड की प्रैक्टिस करनी पड़ेगी या झुकी से ही काम चल जाएगा। हथिनियां राखी के स्वयंवर की तर्ज़ पर सूंडें देखकर वर चुन रही हैं। सवाल पूछती हैं- 'वो' वाले पार्क में होकर आया? अगर हां, तो वैसे ही एंगल में सूंड को घुमा कर दिखा। अगर हाथी कामयाब रहा तो भी शादी नहीं, सिर्फ़ सगाई। निगोड़ी ख़ुद को राखी समझ रहीं हैं। कहती हैं, अगले चुनाव तक देखूंगी, अगर सूंड का घुमाव ठीक रहा तभी शादी होगी। हाथी बिचारे- इस 'सच का सामना' करते-करते परेशान है। इस समय हाथियों की दुनिया का सबसे हिट वीडियो है- 7 दिन में 'उसी' पार्क जैसी सूंड कैसे उठाएं। तो ये गफ़लत है, हमारे गजराज की। उनकी इस परेशानी को देखकर तो मैं भी बेहद परेशान हो गया हूं।

अब तो मैं उसको ढूंढ़ रहा हूं जो इस सारी भ-सूंड की जड़ है।

Sunday, August 2, 2009

आरा मशीन पर रख दो सारे ग़म

कंस्ट्रक्शन का बूम है
कुछ तो फ़ायदा उठा लो
मेरी मानो
आरा मशीन पर रख दो सारे ग़म
एक-एक ग़म
बेमौत मरेगा
टुक़ड़े-टुकड़े
यहां-वहां गिरेगा
रह जायेंगी बस ख़ुशियां
समेट के सारी
ख़ुशियां प्यारी
ग़म की दीवार ढहाओ
इमारत बुलंद बनाओ