Saturday, October 18, 2008

मैं हूं



मिलना चाहते हो मुझसे
मिलो
मैं हूं
एक ग़रीब लड़की
देखो मुझे
ऐसे क्या देखते हो
घृणा से नहीं थोड़ा प्यार से देखो
मेरे इन मैले कपड़ों को नहीं
इन नंगे पांवों को नहीं

अगर वाक़ई देखना चाहते हो तो
इन आंखों को देखो
इस वक़्त खुश चेहरे को देखो
क्या आंखों में कोई डर देखा
या कि चेहरे पे दर्द की कोई रेखा

नहीं
तुमने ज़रूर देखी होगी
उम्मीद की एक किरण
क्योंकि मैं हूं
एक गीत
बोलो गाओगे मुझे
संभावनाओं का पुलिंदा
अपनाओगे मुझे
फिर?

आओ मिलो मेरे परिवार से
वो खाट पे लेटा शराबी बाप
ये बीमार मां
और मेरे दो भाई तीन बहनें

मुझे नहीं चाहिए
सहानुभूति तुम्हारी
क्योंकि मुझे पता है
मैं हूं
पेट पालने लायक
आठ जनों का
मैं हूं ख़त्म करने के क़ाबिल
सिलसिला ये उलझनों का

बस यही है मेरी कहानी
बोलो
छापोगे कहीं लिखकर
मैं हूं

Friday, October 10, 2008

सेंसेक्स के उस्ताद, सेंसेक्स के जमूरे


साहेबान, क़दरदान, मेहरबान, ...आइए, बस चले आइए। खेला इतना मस्त दिखाएंगे कि मज़ा आ जाएगा। बोल जमूरे तैयार है।
-जी उस्ताद बिल्कुल तैयार हूं।
जमूरे, कहां का खेला दिखाने वाले हैं हम।
शेयर बाज़ार का, उस्ताद।
शाबाश जमूरे...बटोर ले लोगों से पैसा, एक भी बंदा छूटने न पाए। अरे साहेबान, डरिए मत जमूरे को बेहिचक पैसा सौंप दीजिए...हिन्दुस्तान तरक़्क़ी कर रहा है, आपका पैसा दुगुना, तिगुना या फिर चौगुना भी हो सकता है। अरे ओ नीली कमीज़ वाले साहब। काहे घबराते हैं। देखते नहीं, सेंसेक्स कैसे कुलाचें भर रहा है। समझ लो कि सांड पागल होकर बेतहाशा आगे भाग रहा है। हां जमूरे बटोरता रह, बढ़ता रह...बटोरता रह, बढ़ता रह। ये हिन्दुस्तान का मस्त लोग है...खुलकर पैसा देगा। जमूरे, जेबें उलटवा के देख लेना, कुछ छूटने न पाए। बदले में इन्हें मालामाल कर देंगे।

जमूरा(उस्ताद के कान में)- कुछ लोग बिना पैसा दिए भागने की फ़िराक में हैं। क्या करुं?
उस्ताद- अरे लगता है पहले इन्हें कुछ कमाल करके दिखाना होगा।जमूरे, काली शर्ट वाले साहब ने बाज़ार में कितने पैसे लगाए है?

समझ गया उस्ताद...
-देखिए, काली शर्ट वाले साहब के दस हज़ार बन गये पूरे पच्चीस हज़ार। कुछ ही वक़्त में कैसा ग़ज़ब हुआ है। तो आगे आइए, डरने का नहीं, हिचकिचाने का नहीं। दिल खोलकर पैसा लगाने का...पैसा बनाने का। पैसा लगाने का...पैसा बनाने का।
कुछ ही समय बाद उस्ताद के पास लाखों रुपये जमा हो गए और उतने ही समय बाद सेंसेक्स की कुलांचें, कुल मिलाकर आंच बन गईं। सांड को अकेले में देखकर भालुओं के झुंड ने उस पर हमला कर दिया। दलाल स्ट्रीट, हलाल स्ट्रीट बन गई। नतीजतन उस्ताद के पास जमा लाखों की रकम सिक्कों की खनक के बराबर रह गई। लेकिन उस्ताद कोई झूठमूठ के लिए उस्ताद थोड़े ही था। वो तो सचमुच उस्ताद था।
-जमूरे, अब इन लोगों को बता दो कि क्या करना है।
-जी उस्ताद। तो साहेबान, पैसा देने के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया। हमको मालूम कि आपको पता चल गया है कि सेंसेक्स का रफ़्तार पलटी मारने का। लेकिन आपको घबराने का नहीं। डरने का नहीं। बोले तो पैनिक होने का नहीं और सुसाइड तो बिल्कुल नहीं करने का। अभी पलटी मारा है तो एक और पलटी और फिर सब ठीक...हम सबको पैसा बना के देगा। लेकिन उसके वास्ते इंतज़ार करने का। अरे काली शर्ट वाला साहब, आप क्यूं रोता है आप तो पहले दस का पच्चीस बनाया था। अब पच्चीस का दो रह गया तो हमारा मिस्टेक थोड़े होने का।
अभी का लिए घर जाके, चादर तान के सोने का। नींद में मौत आसान बन जाती है, उस्ताद बोलता है।