Monday, January 19, 2009

जब प्रधानमंत्री आम आदमी बने !


प्रधानमंत्रीजी आम आदमी बन गए। टीवी से लेकर अख़बारों तक में यही सुर्ख़ियां। भई आम आदमियों की तरह पीएम साहब अपना लाइसेंस रिन्यु कराने आरटीओ दफ़्तर जा पहुंचे। इससे ज़्यादा वो आम आदमी साबित करने वाला क्या काम करते? जब वो 11 बजे पीएम आवास से निकले तो वहां से आईटीओ स्थित आरटीओ दफ़्तर तक के रास्ते को आम ट्रैफ़िक के लिए रोक दिया गया। अरे, नहीं समझे? अपने पीएम आम आदमी बनने जा रहे थे। फिर निकले आम आदमी बनने की हसरत लिए पीएम साहब। वो न ऑटो में निकले, न बस में, न मेट्रो में और न ही अपनी मारुति 800 में। वो निकले तो दसियों गाड़ियों के काफ़िले के साथ। दिन रविवार का था लेकिन कोई बात नहीं पीएम साहब को आम आदमी बनाने के लिए रविवार को भी दफ़्तर तो खोला ही जा सकता है। पीएम साहब से प्रार्थना की गई थी कि लाइसेंस उन्हें पीएम आवास में ही सारी औपचारिकताएं पूरी कर दिया जा सकता है। लेकिन अगर ऐसा होता तो पीएम आम आदमी कैसे बन पाते। इस पूरी क़वायद में जो हज़ारों आदमी परेशान हुए वो सारे भी 'आम' थे लेकिन वो पेड़ से गिर गए हैं जबकि पीएम साहब अभी पेड़ पर ही लटके हुए हैं।

11 comments:

  1. बहुत सटीक टिप्पणी,या कहू आम आदमी का दर्द है .इसी पर मेरा आज का व्यन्ग्यचित्र देखे.

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  2. नेता इस प्रकार के प्रदर्शन करते रहते हैं सुर्खियों में बने रहने के लिए

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  3. बहुत सही..बहुत सही....एक आम आदमी के लेख को एक आदमी का समर्थन....
    हिंदयुग्म ने बैठक नाम से नया ब्लॉग शुरू किया है...पता है www.baithak.hindyugm.com
    वहां आपको निमंत्रण हैं....आम आदमियों के लेख वहां भी छपते हैं और पढे भी जाते हैं...
    baithak.hindyugm@gmail.com पर आप भी भेजना शुरू कर दे..
    और क्या हाल-चाल...

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  4. कहानी तो सुंदर लगी ही इस का अंत बेहद प्रभावित कर गया ...बहुत अच्छी कहानी लगी यह

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  5. मनमोहन जी को आम आदमी बनने की आवश्यकता नही वो गलती से राजनीति में आ गए हैं और उन्हें मंझे हुए कांग्रेस्सियों द्बारा ट्रेनिंग दी गई है। ये स्टंट भी उन्ही की सुझाया हुआ होगा॥

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  6. खास आदमी खास ही रहता है। वह आम हो ही नहीं सकता। आम भले ही खास हो जाए।

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  7. क्या भीषण नौटंकी है.

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  8. इसे कहते हैं आम के आम गुठलियों के दाम ....!

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  9. मैँ तो भुल गया था पर अब याद आ गया कि चुनाव नजदीक है।

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  10. मुझे तो पहले से ही शक था की हो न हो ये महाशय भी आम आदमी ही है वरना मैडम इन्हे यहाँ क्यो बिठाती ?

    उस शाम का किस्सा याद आया जब एक छोटे से लड़के ने पूछा कि ये आमआदमी क्या होता है . उसने टी वी पर सुना होगा आजकल हर किस्म का छोटा बड़ा नेता बड़ी श्रधापूर्वक आम आदमी के दुखो का रोना लेकर रोता रहता है , महंगा पेट्रोल , मुद्रास्फीति और आम आदमी .
    आस पास बैठे लोग ( जो कि आम लोग ही थे ) चुप बैठे थे , जैसे उन्हें पता ही न हो कि आम आदमी क्या होता है ?
    असल में उनका भी दोष नहीं था , किसी ने आजतक define ही नहीं किया कि ये आम आदमी कौन है ( किसी में हिम्मत ही नहीं थी )
    सब चुप थे तो चाचा ने मेरी तरफ़ देखा ( कि तुम तो सुना है बहुत बक बक करते हो ) अब संभालो !
    ( मुझे तो पता था कि आम आदमी गधा होता है )
    अब में इन्हे और उस छोटे लड़के को कैसे बताऊँ कि आम आदमी क्या होता है ?
    फ़िर भी जब आन पड़ी थी तो कुछ तो करना ही था .
    मैंने उस बच्चे से कहा कि ये आम आदमी भी आम की ही तरह होता है , जैसे आम को कई तरह से जैसे चटनी बना कर , मुरब्बा बनाकर , आम की लस्सी बना कर , अचार बना कर या फ़िर वैसे ही चूस कर उपभोग किया जाता है ठीक वैसे ही आम आदमी का भी तरह तरह से समाज के खास आदमी उपभोग करते हैं .
    उस बच्चे ने मुझे आश्चर्य से देखा , साथ ही उन आस पास बैठे लोगो ने भी मुझे आश्चर्य से देखा . जाहिर था कि बात उनके पल्ले नहीं पड़ी .
    मैंने उन्हें समझाया कि समाज में सिर्फ़ दो ही वर्ग हैं - एक आमआदमी व् एक खास आदमी .
    आम आदमी का काम है आम कि तरह उपयोगी होना और खास आदमी का काम है आमआदमी का आम कि तरह उपभोग करना .
    अभी भी उनकी आँखों में अविश्वास झलक रहा था .
    मैंने फ़िर कोशिस कि समझाने की कि खास आदमी ( तरह तरह के VIP , मंत्री , मुख्यमंत्री , प्रधान मंत्री ,,जिलाधीश , पुलिस का अध्यक्ष वगेरह ) ये सब एक आम आदमी को चपरासी बनते हैं , दुसरे को चोकीदार बनते हैं तीसरे को ड्राईवर , चौथे को खानसामा , पाँचवे को बाडीगार्ड और इसी तरह के सैकडो अन्य आम आदमी जो इन खास लोगो का हुक्म बजाने को तैयार रहते हैं , आमआदमी का उपभोग करते हैं .
    आम आदमी पट्रोल महंगा होने से चाहे बस में सफर करे खास आदमी को कार भी और पेट्रोल भी सरकार देती है , इनकी जेब से कुछ नहीं जाता . मुद्रास्फीति से चाहे आम आदमी का चूल्हा जले ना जले ,खास आदमी की पार्टिया बरक़रार हैं , वो भी फ्री में .
    आम आदमी टैक्स देता है , देता रहता है .
    ख़ुद फाके करता है ,लेकिन खास आदमी के ऐशो आराम में कमी नहीं होने देता .
    अब तुम्ही बताओ कि आम आदमी गधा है कि नहीं ?

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