Tuesday, January 18, 2011

मेरे ख़ुदा, मुझे माफ़ करना, उन सारे मौक़ों के लिए जब मैंने तुझे कोसा हो !


फ़रीदाबाद स्टेशन....प्लेटफ़ॉर्म पर काफ़ी भी़ड़ थी। वैसे भी सर्दियों में प्लेटफ़ॉर्म ठसाठस ही रहते हैं। आगरा के रास्ते में था मैं। अपनी पसंदीदा-विंडो सीट पर बैठा हुआ। गाड़ी रुकने पर खिड़की से बाहर झांका। नज़रें तमाम व्यक्तित्वों और दृश्यों का मुआयना करते हुई जहां ठिठकीं वो तस्वीर शायद दिमाग़ के किसी हिस्से में हमेशा ताज़ा रहेगी। और मैं शिद्दत से चाहता हूं कि ऐसा ही हो क्यूंकि अगर ऐसा नहीं हुआ तो मुमकिन है मैं ज़िंदगी में भगवान को वक्त बेवक्त गालियां दूं।
बड़ी-बड़ी आंखें- ज़िंदगी में डूबी हुई, ख़ूबसूरती शायद इसी को कहते हैं, जिसे देख कर ये लगे--ऐसी थी वो लड़की। खिलखिलाहट से भरी हुई। अपने मां-बाप, रिश्तेदार जो भी रहे हों उनसे बातचीत में तल्लीन। ज़िंदगी को पूरी तरह जीना आता होगा उसको।

व्हील चेयर पर थी वो लड़की, हाथ भी पूरी तरह काम नहीं कर रहे थे।

मेरे ख़ुदा, मुझे माफ़ करना, उन सारे मौक़ों के लिए जब मैंने तुझे कोसा हो।, माफ़ करना उन तमाम 'काश' के लिए जो मैंने अक्सर ही लगाए। मेरे हाथों की सारी उंगलियां ठीक से काम करती हैं। मैं चल सकता हूं..दौड़ सकता हूं, उछल सकता हूं। मेरा दिमाग़ ठीक तरह से काम करता है। सही जगह पर धड़कता हुआ एक अदद दिल है। चाहने वाले कुछ दोस्त हैं, परिवार है।  और क्या चाहिए मुझे ज़िंदगी जी लेने के लिए। हां, मैं दुनिया का सबसे ख़ूबसूरत इंसान नहीं हूं, न बहुत लंबा, न मोटा बैंक बैलेंस, न पुरखों की जायदाद ही। क्या ये सब मेरे ख़ुश रहने के बीच आने चाहिए? पर मैं जानता हूं, मेरे मालिक, कि मैं इंसान हूं सो एहसाऩफ़रामोश भी। तो इतने पर भी कई बार तुझे कोसना चाहूंगा, लेकिन कोसूंगा नहीं क्यूंकि मुझे फ़रीदाबाद के प्लेटफॉर्म पर देखी वो खिलखिलाती लड़की बहुत याद आयेगी। और मैं, परेशानी कितनी भी बड़ी हो, उससे दो-दो हाथ करने के लिए तैयार हो जाउंगा।
और हां, तूने जैसा बनाया, उसके लिए बहुत शुक्रिया !

7 comments:

  1. शर्म आनी चाहिये तुम्हें अगर तुम इसके बाद भी भगवान को नहीं कोसोगे तो....अगर वो होता तो इतनी हसीन लड़की को यूं मजबूर न बनाता....उसकी खिलखिलाहट के पीछे एक दर्द न छुपाता....तूने जे लिखा उससे मुझे एक और वजह मिल गई खुदा को न मानने की...

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  2. अगर यहां बहस की शुरुआत की तो तकरीरें तू ख़ूब होंगी लेकिन नतीजा नहीं निकलेगा। कभी बैठ कर तफ़सील से चर्चा करते हैं उसके होने, न होने पर।
    वैसे अगर तेरा ऐसा कमेन्ट नहीं आता तो मुझे काफ़ी ताज्जुब होता...आस्थाएं इतनी आसानी से हिल जायें तो आस्था कहां रहतीं फिर वो आस्था उसके Non-existence में ही क्यूं न हो!

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  3. प्रबुद्ध .. तू कैसे इतना प्यारा सा लिख लेता है.. हम लोग सच में बहुत ख़ुशकिस्मत हैं.. बस चाहतें और 'काश' इतने हैं की उसके आगे सब भूल जाते हैं... जिसकी मौजूदगी हमें कभी अनोखी नहीं लगती उसकी कमी कितनी खलती है ..यह हम सोच भी नहीं सकते । भगवान् को मेरा भी शुक्रिया.. छोटी सी दिखने वाली हर बड़ी नेमत के लिए...
    "" पर मैं जानती हूं, मेरे मालिक, कि मैं इंसान हूं सो एहसाऩफ़रामोश भी। तो इतने पर भी कई बार तुझे कोसना चाहूंगी , लेकिन कोसूंगी नहीं क्यूंकि मुझे यह 'पोस्ट' हमेशा याद रहेगा.. और मैं, परेशानी कितनी भी बड़ी हो, उससे दो-दो हाथ करने के लिए तैयार हो जाऊंगी । ""
    अब एक बात अनुराग से कहनी है.. सच में हैरानी होती अगर तू यह न बोलता तो.. खुदा को न मानने के लिए तुझे वजह चाहिए .. एक नहीं ..कई.. पर उसे मानने के लिए तो एक भी वजह नहीं चाहिए.. भगवान् ने उस लड़की को मजबूर नहीं ... मज़बूत बनाया है.. कमी किसे नहीं दी है.. पूरा किसी को नहीं बनाया है.. न तू.. न मैं.. न इस पोस्ट को लिखने वाले को.. और न ही उस लड़की को.... हर किसी की कमी एक अलग तरह की है.. उसकी कमी अगर शारीरिक है... तो किसी की मानसिक.. तुझमें एक अलग कमी है.. और मुझमें अलग.. पर ख़ुदा की ख़ूबसूरती देख.. कहीं कमी करके कहीं और पूरा करता है.. उसके हाथ पैर में कमी की... तो जज़्बे में कमी पूरी कर दी.. इतनी हिम्मत भर दी की तेरे मेरे जैसे हाथ पैर वाले भी शर्मा जायें.. और ख़ुदा के इस तराज़ू की तोल को किसी भी इंसान पर लागू करके देख ले.. टोटल हमेशा '१' ही आयेगा!

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  4. अनुराग से सहमति.
    खुदा अगर कहीं है, तो वो अपने सिर्फ इसी कृत्य को देख कर शर्म से डूब मरता!

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  5. उसकी केलकुलेशन अक्सर डिबेट का टोपिक रही है ....बारहा !!

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  6. सर्वप्रथम प्रबुद्ध जी आपकी सोँच मुझे अच्छी लगी और खुदा को मानने वालोँ की तो बात ही नहीँ पर न मानने वालोँ के लिये ये बहुत बड़ा सँकेत है और उन्हेँ कम से कम तब खुदा को नहीँ कोसना चाहिये जब उसी खुदा ने उस लड़की के जीवन मेँ मुस्कुऱाहट नामक तोहफा. दिया है विरोध प्रकट करने वालोँ को ये सोँचना चाहिये कि वे और हम भी स्वस्थ होते हुये भी कितने मौँकोँ पर खुल कर हँसते हैँ और तब सोँचिये वो लड़की भाग्यशाली है या हम ! धन्यवाद और यदि किसी को कष्ट पहुँचा हो तो SORRY

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  7. सर्वप्रथम प्रबुद्ध जी आपकी सोँच मुझे अच्छी लगी और खुदा को मानने वालोँ की तो बात ही नहीँ पर न मानने वालोँ के लिये ये बहुत बड़ा सँकेत है और उन्हेँ कम से कम तब खुदा को नहीँ कोसना चाहिये जब उसी खुदा ने उस लड़की के जीवन मेँ मुस्कुऱाहट नामक तोहफा. दिया है विरोध प्रकट करने वालोँ को ये सोँचना चाहिये कि वे और हम भी स्वस्थ होते हुये भी कितने मौँकोँ पर खुल कर हँसते हैँ और तब सोँचिये वो लड़की भाग्यशाली है या हम ! धन्यवाद और यदि किसी को कष्ट पहुँचा हो तो SORRY

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आपकी टिप्पणी से ये जानने में सहूलियत होगी कि जो लिखा गया वो कहां सही है और कहां ग़लत। इसी बहाने कोई नया फ़लसफ़ा, कोई नई बात निकल जाए तो क्या कहने !