Saturday, January 8, 2011

11 करोड़ का गंभीर बनाम 50 रुपये किलो का प्याज़


सुबह के करीब ग्यारह बजे होंगे। अपने क्षेत्रीय चैनल की डेस्क पर साढ़े बारह बजे महंगाई पर होने वाले शो की रूपरेखा बनाई जा रही थी। सरकार के तमाम दावे कैसे महंगाई डायन को रोकने में नाकाम हो रहे हैं, कैसे प्याज़ किसी के क़ाबू में नहीं आ रहा वग़ैरह, वग़ैरह। ये सब तय हो ही रहा था कि कुछ मीटर की दूरी से एक तेज़ चीख़ ने कानों के पर्दे पर अतिरिक्त वाइब्रेशन पैदा कर दी। गौतम गंभीर- 11 करोड़ 4 लाख। ये चीख़ नेटवर्क के नेशनल चैनल से आई थी। अचानक याद आया कि अरे हां, आज तो आईपीएल 4 की नीलामी का दिन है। फिर तो चीख़ों का सिलसिला थमा ही नहीं। यूसुफ़ पठान, युवराज सिंह, एबी डि विलीयर्स, रॉस टेलर। सबके साथ करोड़ों का एक टैग चस्पा। मैं चूंकि दिल्ली-एनसीआर के चैनल से वास्ता रखता हूं तो गौतम गंभीर के सबसे महंगे बिकने और दिल्ली डेयरडेविल्स की बजाय कोलकाता से खेलने की ख़बर अहम हो गई। तय किया गया कि हर बार टॉप ऑफ़ द व्हील यही ख़बर चलेगी। यानि हर बुलेटिन की पहली ख़बर। फ़ोनो लो, कुछ रियेक्शन्स मंगा लो कि दिल्ली वाले कितने मायूस हैं, इस ख़बर से। क्रिकेटरों की महामंडी से एक के बाद आंकड़े आते जा रहे थे। प्याज़-टमाटर की महंगाई का मुद्दा ऐसे आंकड़ों के सामने रखने भर से छोटेपन का एहसास हो रहा था। अरे, अपने देश में करोड़ों की मंडी सजी है और अपन न जाने क्यूं इस प्याज़-टमाटर से ऊपर ही नहीं उठ पा रहे। बड़ी छोटी सोच है हमारी।
अचानक न्यूज़ चैनलों के मायावी पर्दों से प्याज़ ग़ायब होने लगा। सब्ज़ीमंडी की जगह सज चुकी थी क्रिकेट की महामंडी। समझ आ गया कि कम से कम अगले दो दिन तक महंगाई की मजाल है कि ख़बरिया चैनलों को छू तक ले। और बेचारा 50 रुपये किलो का प्याज़ हिम्मत करे भी तो कैसे? मरगिल्ला प्याज़ क्या खाकर पछाड़ेगा 11 करोड़ के गंभीर को? 18.32 फ़ीसदी की खाद्य महंगाई दर भी थर-थर कांपने लगी है इस नीलामघर के रोब के आगे।
फ़रवरी मे देशवासियों को वर्ल्ड कप के महाकुंभ की सौगात मिलेगी और फिर मिलेगा आईपीएल का बुख़ार। यानि ये महंगाई-वहंगाई जैसे मनहूसियत भरे शब्द अब बस विदा लेने को हैं। धन्य है क्रिकेट, धन्य है बाज़ार और धन्य है मेरा मुल्क़।

1 comment:

  1. बढ़िया है प्रबुद्ध बाबू..अच्छा लिखा है

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