Saturday, December 17, 2011

कच्ची शराब से मरे तो क्या मरे



45 मौत...फिर 73
फिर 93, 125, 143
और आख़िर में
170 पार
मक़तूलों* में शामिल थे
रिक्शेवाले, रेहड़ी वाले
और मुमकिन है कुछ भिखारी भी
मक़तूल..हां मक़तूल ही तो थे
जिन्हें बड़ी बेरहमी से
क़त्ल किया गया था
कच्ची शराब की हर बूंद
शिराओं में ज़हर घोल गई

170 पार !
रूखे सूखे आंकड़ों को
नंगे भूखे लोगों को
सियासत नहीं आती
बस छाती पीट कर
ग़म का इज़हार आता है
जहां सटल्टी नहीं होती
बस ग़म और गुस्से का
ज्वार होता है

इन चितकबरे बदसूरत लोगों को
टीवी का पर्दा मिलता है
कुछ मिनट ही
दिल्ली से 1500 किलोमीटर दूर
ख़बरों को जुटाना
महंगा पड़ता है काफ़ी
पर ये नासमझ कंबख़्त
मरने से पहले कहां सोचते हैं ये सब
तो अब भुगतो
कच्ची शराब की पक्की मौत

अरे नामुरादों
तुम्हें मौत भी आई तो कैसी
दोहरे शतक के नज़दीक हो
और दो ही मिनट की ख़बर
तुम्हें बतौर श्रद्धांजलि पेश की जाएगी
क्योंकि काउंटडाउन शुरु हो चुका है
भारत रत्न से एक क़दम दूर वाले
भगवान के महाशतक का
उधर रुपया डॉलर के मुकाबले
कितना कमज़ोर हो गया है जानते हो
कैसे जानोगे
होगा तो जानोगे न...
चिदंबरम पर वार तीखे हो चले हैं
पता है पता है, नहीं पता होगा तुम्हें
और वीना मलिक लापता हैं
मल्लिका -ए-टीवी वीना मलिक

अब चूंकि ये तुम्हारी
आख़िरी मौत तो है नहीं
तुम्हें कई बार और भी मरना है
तो अगली बार
इतनी बड़ी बड़ी ख़बरों से
टकराने की कोशिश मत करना
मौत से लिपटना ज़रूर
लेकिन हो सके तो
अदद वक़्त और जगह तय करके

और हां कच्ची शराब से तो बिल्कुल नहीं
बड़ी डाउनमार्केट है स्साली

मक़तूल--जिसको क़त्ल किया गया हो

2 comments:

  1. तीखा कटाक्ष करती समसामयिक रचना ..

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  2. बहुत ख़ूब..!
    तख़्त-ओ-ताज से रिश्ता भी अच्छा रहा..

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