Wednesday, October 17, 2007

हमऊ ब्लॉगिया गये !




लोग पगलाते हैं लेकिन हम ब्लॉगिया गये हैं। और मज़ेदार बात कि ये पागलपन ख़ुद का मांगा हुआ है। सच्ची। कितने वक़्त से कितना कुछ कहने की इच्छा थी। अब शायद वो सब पूरा होगा। ख़्वाबों को पंख मिल जाएं इससे बेहतर भला क्या हो सकता है। लेकिन भैया (बहनें लिखना ख़तरे से ख़ाली नहीं) ये मैं क़तई नहीं चाहूंगा कि इस पर सिर्फ़ मैं ही बक बक करता रहूं और आप सर्फ़िंग की सड़क पर रैड लाइट की तरह रुकें और आगे बढ़ जाएं। अच्छा होगा कि ये चिट्ठा रैड लाइट न होकर एक पुल बने - लोगों का, ख़्वाहिशों का और अनकही बातों का। विचारों की आंधी हर तरफ़ से बहे। आप भी कहें मैं भी कहूं। हां, मैं टीवी पत्रकार हूं तो ज़ाहिर है इस बहुरंगी दुनिया की बातें ज़्यादा करुंगा लेकिन वादा ये कि बात हर तरफ़ की होगी। 'इसी बहाने' आप सब से बातें होंगी और अभिव्यक्ति के इस अद्भुत माध्यम की ताक़त के साथ जीने का मौक़ा मिलेगा। उम्मीद है कि साथ जो शुरु हुआ है बना रहेगा।

9 comments:

  1. सच्ची कहती हूं आपको ब्लॉगियाते देखकर बेहद खुशी हो रही है।ऐसे ही लगे रहिए ताकि हमें 'इसी' या 'किसी' बहाने कस्बे या मोहल्ले न जाना पड़े।

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  2. Vaise to tu jo bhi likhe, jo bhi kahe...main hamesha usse achaa kahoongi....kyonki tu mera ladla bhai hai...par phir bhi...blog ka preface padne main maja aaya....here's to your attempt to leaving your fingerprints in this amazing world....soon this blog would be "famous"!!!!!! All the best!!!

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  3. ek baat kahoon jab tumne kaha ki tum blog kar rahe ho to mujhe laga shyad badi bhari bharkam cheeze likhoge lekin padh ke accha laga ki kuch na likh kar bhi kaafi kuch likha...iska saboot ye hai---kuchtolikho.blogspot.com......good start

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  4. चलो इसी बहाने मैं भी ब्लगियाउंगा।मेरे मित्र विचारों को रखने का ये अच्छा मंच हो सकता है।तेरे इस प्रयास को मेरी शुभकामनाएं।

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  5. लगता है दुबारा दीक्षांत समारोह करवाके तुम्हारा टाइटल बदलवाना पड़ेगा? टाइटल मिल गया तो क्या अपने ग्रुप में सबसे पहले कंप्यूटर पर ब्लॉग की शुरुआत भी तुम्ही करोगे?ये तो खैर मजाक था,पर अच्छा प्रयास है अब 'इसी बहाने' हमें अपने मन की बात कहने(जिसको कोई नहीं सुनता) या तुम्हारी बात पर एक कमेंट करने को तो मिलेगा(वैसे तो शायद तुम सुनो या ना सुनो)

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  6. तुमने एक ऐसा माध्यम चुना है है जिसमें लेखक, संपादक और प्रकाशक भी तुम ही होगे। सबसे अच्छी बात कि कोई ऐडिटोरियल कंट्रोल नहीं होगा। सर्कुलेशन का झंझट भी नहीं है। तो फिर शुरू हो जाओ.....ऐसे मेरे ब्लॉग का लिंक टाईटिल मज़ेदार दिया है। शुभकामनाएँ...एक सार्थक शुरुआत के लिए।

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  7. Batein kuch ankahi,soch kuch adhjanmi,
    'Isi Bahane' mil gayi unhein abhivyakti ki zamin,
    Tumhare khwabon ko yun jo mile pankh to,
    'Isi Bahane' ek udaan khwab hamare bhi bhar lenge..
    Luv you bro..CONGRATS for this dhaansu start.Gud luk :-)

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  8. khwabon ko pankh milen
    honslon ko udaan
    sapno ko rang milen
    aur sach ko zuban.......
    ab agar mein gabbar ka dialog copy karoon to..achha hai,bahut achha hai!!
    all the best

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  9. हौसला अफ़ज़ाई के लिए सभी का शुक्रिया!

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आपकी टिप्पणी से ये जानने में सहूलियत होगी कि जो लिखा गया वो कहां सही है और कहां ग़लत। इसी बहाने कोई नया फ़लसफ़ा, कोई नई बात निकल जाए तो क्या कहने !