Monday, May 18, 2009

जब ख़ून पानी से सस्ता हो गया !



चुनावी नतीजों की धांयधांय के बीच ये ख़बर शायद ही किसी ड्रॉइंग रूम में बातचीत का बहाना बने लेकिन यक़ीन मानिए लोकतंत्र के सबसे बड़े मेले से ये ख़बर पूरी तरह जुड़ी हुई है। भोपाल में तीन लोगों की- मां-बाप और उनके बच्चे की सरेआम चाकू मारकर हत्या कर दी गई। आप कहेंगे, इसमें क्या हुआ, बर्बर होते समाज में ये तो कोई बड़ी बात नहीं हुई। वजह सुनने के बात शायद आपको सवाल करने की ज़हमत नहीं उठानी पड़ेगी। इन तीन बदनसीबों का क़सूर सिर्फ़ इतना था कि वो जल बोर्ड की पाइपलाइन से पानी चुरा रहे थे। गंभीर जल संकट से जूझते मध्य प्रदेश के इस हिस्से में कुछ लोगों को ये बर्दाश्त नही हुआ। क्यूंकि उन्हें भी चाहिए था- अपने हिस्से का पानी। सो पानी के चक्कर में तीन लोगों का ख़ून पानी बनकर बह गया। लेकिन जो चीज़ सबसे ज़्यादा डरावनी है वो है बाद की तस्वीर। मौजूद लोगों ने तीनों मृतकों को ज़मीन पर तड़पता छोड़ जल्द से जल्द पानी भरना बेहतर समझा। घटना के एक घंटे बाद ही पुलिस ने आकर तीनों शव उठाए।

प्रदेश में बीजेपी की सरकार है और केन्द्र में यूपीए की। दो ऐसी सरकारें जो विकास और ट्रबलशूटिंग स्किल्स के दम पर दो बार चुनी गईं। लेकिन जब ख़ून पानी से सस्ता होने लगे तो हालात बदलने के तरीक़े सरकारों को ही तलाशने होंगे। ये सच है कि प्रदेश बेहतर वर्षा से वंचित रहा है लेकिन ये ज़िम्मेदारी से मुंह मोड़ने का बहाना क़तई नहीं हो सकता। ख़ास तौर पर तब जब हालात इस क़दर ख़राब हो जाएं। फिर लोकतंत्र की जीत और विकास के नाम पर लौटती सरकारों पर कैसे भरोसा करें ?

3 comments:

  1. दुखद ख़बर....लेकिन सोचने वाली बात यह है कि आजादी के इतने दिनों के बाद हम पहुंचे कहां तक हैं। एक तरफ़ तो हम दुनिया के सबसे वाईब्रेट और बड़े लोकतंत्र का दंभ भरते नहीं थकते, वहीं उस लोकतांत्रिक व्यवस्था का एक चेहरा यह भी है। ज्यादा मुखर चेहरा...। हमारी उपलब्धी का अंदाजा तो इसी से लगाया जा सकता है, कि हम राजधानी में पानी तक मुहैया करा पाने में असफ़ल रहे हैं। गांव और दूर-दराज के इलाकों के बारे में सोचना भी बेमानी है। भोपाल का बड़ा तलाव पूरे शहर में पानी का एकमात्र स्त्रोत है। पिछले कई सालों से यह धीरे-धीरे सूख रहा है। और सरकार तमाशाबीन बनी हुई है। आखिर किस मुंह से वोट मांगने गए थे शिवराज...!!!!

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  2. Rajiv:

    Why blame Shivraaj...
    We have to look inside.
    We are all to blame for this.
    We do nothing about it and let the things go out of hands.

    Congress has been in power too for 10 years!!
    What did they do??

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  3. Dear Jayant,

    When I talk of Shivraj, its more of a symbolism. I tried hitting out at our system. Shivraj or Digvijay are just names. It's the administration, it's lathergic attitutde of the incumbent in the office & we the people are equally responsible for what we are seeng today.

    tks.
    rajiv

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आपकी टिप्पणी से ये जानने में सहूलियत होगी कि जो लिखा गया वो कहां सही है और कहां ग़लत। इसी बहाने कोई नया फ़लसफ़ा, कोई नई बात निकल जाए तो क्या कहने !