Saturday, May 23, 2009

पहली उड़ान का जादू


एक लंबे इंतज़ार के बाद आख़िर मैं भी बादलों के पार हो ही आया। होश संभालने के बाद करीब 20 साल से ज़्यादा का लंबा इंतज़ार। लेकिन इसको इतना भर कहना ठीक नहीं होगा। दरअसल दिल्ली से पुणे तक का हवाई सफ़र यादों का वो सफ़र भी था जिसे मैंने होठों पर तैरती हल्की मुस्कान के साथ तय किया। मुझे याद है बचपन के वो दिन जब प्लेन गुज़रते ही आंखें आसमान की तरफ़ ख़ुद ब ख़ुद उठ जाती थीं...ऊपर की तरफ़ एक उंगली उठती थी...दोस्तों की चंद उंगलियों के साथ और फिर एक ज़ोरदार आवाज़- हवाई जहाज़sss । फिर जहाज़ के ओझल होने तक नज़रें उसका पीछा करती थीं। अरे हां, एयरहोस्टेस को लेकर भी तो जाने कितने ख़्यालात बुने जाते थे। क्या वो वाकई हूर की परी होती हैं? वगैरह, वगैरह। उन्हें देख कर लगा जैसे मैडम तुसाद से कुछ बेहतरीन दिखने वाले महिला पुतलों में बस जान फूंक दी गई हो...काफ़ी मैकेनिकल। शायद उनकी ट्रेनिंग होती होगी ऐसे ही...दो इंच मुस्कान फैलाएं...ध्यान रखें...मुस्कान छलकने न पाए। तब भी लगता था..नहीं यार...इसमें बैठना ज़रुर है। पढ़ा था...राइट बंधुओं ने कितनी मुश्किल से इसे बनाया। जब उनके पिता ने एक पादरी को बताया कि मेरे बेटे एक उड़ने वाली मशीन पर काम कर रहे हैं तो पादरी ने कहा- उनसे कहिए, ये सब छोड़ें, उड़ना देवदूतों का काम है, इंसान का नहीं। लेकिन आज राइट बंधुओं के लिए नतमस्तक हूं। उन्होंने उड़ान भरी...पहले सपनों की और फिर हक़ीक़त की। अब जब मैं भी उड़ आया हूं तो एक नया अनुभव साथ है। पूरे शहर की धड़कन सुननी हो तो इस जहाज़ से बेहतर साधन कोई दूसरा नहीं। स्वर्ग तो पता नहीं कैसा होता होगा लेकिन दूर तक बिखरे बादलों के कालीन को देखना वाकई एक अलग दुनिया के दरवाज़े खुलने जैसा था। मानो किसी की डलिया से कती हुई कपास उड़ कर बिखर गई हो। दूर कहीं सूरज कभी जलता, उबलता तो कभी थकता, छुपता दिखाई दे जाता था। जिंदगी में न जाने कितनी उड़ानें होती रहेंगी, लेकिन उनमें न तो इस पहली उड़ान की रूमानियत होगी और न ही वो जोश।

5 comments:

  1. पहली हवाई यात्रा ऐसी ही होती है..सपनो की उडान.....जो हर बच्चा सपना देखता है...

    ReplyDelete
  2. पहली हवाई यात्रा के अहसास बावुक कर गये...वाकई तब एक रोमांचकारी अनुभव होता है....बहुत बेहतरीन लेखन!!

    ReplyDelete
  3. आशुतोषMay 24, 2009 at 8:45 AM

    पहले तो पहली उड़ान की मुबारकबाद! आपके यादगार अनुभव को पढ़ने के बाद मैं भी जल्द हवाई सफ़र का लुत्फ़ उठाने के लिए उतावला हो रहा हूं।

    ReplyDelete
  4. sahi ha boss free हवाई यात्रा ka maza le rahe ho

    ReplyDelete

आपकी टिप्पणी से ये जानने में सहूलियत होगी कि जो लिखा गया वो कहां सही है और कहां ग़लत। इसी बहाने कोई नया फ़लसफ़ा, कोई नई बात निकल जाए तो क्या कहने !